Friday, 18 November 2011

Ye aansu kewal jaldhar nahi..

gudafternoon one n all..
here s my 1st poem.its title is "ये आंसू केवल जलधार नहीं "..
this poem describes the different emotions n reasons behind a drop of tear.tears may sound a little sorrowful or tragic but this is not always true.. tears are treasures of emotions ..it also shows the brighter part of our life at times...


   ये आंसू केवल जलधार  नहीं 

ये आंसू केवल बहती  जलधार नहीं ,
उमड़ते -घुमड़ते उजले गहरे भावुक मेघों की तकरार यही  |

केवल दुःख में बहना ,नियति नहीं ,  
सुख प्रकटन का भी आधार यही  |

इसी से भरे मिले हैं सदैव रूठे नयन क्षेत्र ,
मनाने पर यही ,झलकाते  हैं  दुःखी  नेत्र  |

दर्द की कराह से पहले आँखे नम यही करते हैं ,
विरह में सजल नेत्र स्वयं ह्रदय पीड़ा कह देते हैं |

विजय का हर्ष हो या हो निराशा भरी हार ,
निकट रहे, प्रकट रहे ,जैसे सच्चा  यार यही |

ये आंसू केवल बहती जलधार नहीं |

कभी हंसी कभी ख़ुशी कभी दर्द कभी दुःख ,
इसका ही लेकर आधार सभी ,
अदृश्य को भी करते साकार यही ,
ये आंसू केवल बहती जलधार नहीं |

  

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